दुर्गा पूजा इस वर्ष भव्य पूजा पंडाल

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विष्णुगढ़: विष्णुगढ़ प्रखंड के गाल्होवार पंचायत में सार्वजनिक दुर्गा पूजा को लेकर नवरात्र के प्रथम दिन कलश स्थापना के साथ मां शैलपुत्री की आराधना कर शारदीय नवरात्र पर्व की शुरुआत की गई. शिव मंदिर जलाशय से जल उठाकर घट स्थापित किया गया। मंदिर के पुजारी ब्रह्ममदेव मिश्रा द्वारा पारंपरिक वैदिक दुर्गा पाठ मंत्रो उच्चारण कर मां शैलपुत्री की पुजा आराधना की गई।

मंदिर के पुजारी ने कहा कि शारदीय नवरात्रि हर वर्ष शरद ऋतु आश्विन मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू हो जाता है। जो कि नौ दिनों तक होती है. प्रत्येक दिन मां दुर्गा की तिथि स्वरूप अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के प्रथम दिन नौ दुर्गाओं के स्वरूपो में पहली स्वरूप मां शैलीपुत्री पूजा होती है. माता “शैल” का अर्थ है पहाड़ और “पुत्री” का अर्थ है बेटी. सती भवानी, पार्वती या हेमवती, जिसे पर्वतों के राजा हिमवान की बेटी के रूप में जाना जाता हैं. जिन्हे ‘शैलपुत्री’ कहा जाता हैं।

माता शैलपुत्री एक बैल की सवारी करती है और अपने दो हाथों में त्रिशूल और कमल धारण करती हैं। माता शैली पुत्री की पूजा करने से संतान की वृद्धि धन और अस्वज की प्राप्ति होती है बाकी सभी चीजें माता के ही हाथ में है। ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार गाल्होवार में 1960 ई० पूर्व से दुर्गा मंडप स्थापित कर पूजा प्रारंभ की गई थी। इस वर्ष कमेटी द्वारा पूजा को लेकर पूरी जोर शोर से तैयारी कर ली गई है। इस वर्ष कारीगरों द्वारा विशाल भव्य पूजा पंडाल और माँ दुर्गा की प्रतिमा बनाने में नए रंग रूप देने में हुए हैं। 20 अक्टूबर षष्ठी के रात्रि में सारेगामापा कंटेस्टेंट अनु दुबे और छोटा लक्खा जी के भक्ति जागरण का कार्यक्रम रखा गया है।।

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